Ganga kee lahare गंगा की लहरें - Kavi Abdul Jabbar (GL-1)

 गंगा की लहरें

लहराती गाती आती

 चंचल शीतल मन भाती

सदियों से साथ हमारे

गंगा की लहरें 


रखती है सब को दिल में

सुख दुःख में हर मुश्किल में

देती भरपूर सहारे

गंगा की लहरें

 

जब पवन की परियां पहने बूंदों की पायल

जब घटा से मेघ चुराये नैनों का काजल

जब बाहों में बिजली ले इतराये बादल

 जब पवन चले पुरवाई लहराये आंचल


मल्हार चले मन भावन

जब झड़ी लगाये सावन

हम सबका रूप निखारे

गंगा की लहरें


पापी पावन बन जाये, इसको छू ले तो

अपना बिछुड़ा मिल जाये, इसको छू ले तो

गोद हरी हो जाये, इसको छू ले तो

सुख चैन से घर भर जाये, इसको छू ले तो


आसान करे जो राहें

मीलों फैलाएं बाहें

ले जाओ पुण्य पुकारे

गंगा की लहरें


ये सांसों की सरगम है तन-मन का तराना

 है जनम जनम से रिश्ता इनसे बहुत पुराना

 है सब इसके ये सबकी संसार घराना

इन लहरों से सीखे रे कोई प्रीत निभाना


ये जीवन का दर्शन है

ये जीवन का दर्पण है

 

सुन्दरतम् सभी नज़ारे, इसके आंचल में

मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे, इसके आंचल

में कुदरत ने स्वर्ग उतारे, इसके आंचल में

रूकते हैं चांद सितारे, इसके आंचल में


इनके दर्शन कर ले तो

 खुद को अर्पण कर दे तो

भव-सागर पार उतारे

गंगा की लहरें

 

हर पंछी पर फैलाये, इनके दर्शन कर

 हर फूल चमन महकाये, इनके दर्शन कर

सूरज किरणें फैलाये, इनके दर्शन कर

बादल पानी बरसाये, इनके दर्शन कर


इनके दर्शन कर ले तो

खुद को अर्पण कर दे तो 

भव सागर पार उतारे

गंगा की लहरें।